क्षत्रिय वही है

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क्षत्रिय वही है
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सदा ही सताये जात दीन बलवान् हाथ,
अबलों में बात कटु गोली गिट जाने की।
परत्रान कर्म ही में धर्म मर्म पौरुष का,
जानते न साहस के पुंज सिटजाने की।
ओरत का हाय नाद सुन सकते न वीर,
गाजि उठें दशा देखि दीन पिट जाने की।
क्षत्रिय वही है जिसे स्वाभिमान स्वत्व पर,
बिना दुविधा के चाह मर मिट जाने की।