जोधपुर

0
जोधपुर राजस्थान प्रान्त का एक शहर है।भारत में राजस्‍थान को मरुस्‍थलों का राजा कहा जाता है। बल्यू सिटी के नाम से प्रसिद्ध जोधपुर शहर की पहचान यहाँ के महलों और पुराने घरों में लगे छितर के पत्थरो से होती है, यह सूर्य नगरी के नाम से भी जाना जाता है। यह अपनी महान सांस्कृितक विरासत और ऎतिहासिक धरोहर के लिये पूरे संसार में मशहुर है। अपने महलों और किलों के कारण यह पर्यटकों के आकर्षण का केन्द बन चुका है। इन्‍हीं में से एक है-जोधपुर। मारवाड मे सबसे ज्यादा शासन दहिया राजपुतो ने किया था! राजस्थान मे सबसे ज्यादा गढ दहिया राजपुतो के है इसलिय इसे ग्ढपति का दर्जा दिया गया है! दहिया राजपूत राजाओं का अधिकार सबसे ज्यादा गढो पर रहा है। जोधपुर मारवाड़ों का मुख्‍य वित्तिय राजधानी था, जहां राठौड़ वंश ने शासन किया था। जोधपुर थार मरुस्‍थल के दाहिने छोड़ पर स्थित है। 15वीं शदी में निर्मित किला और महलें यहां आनेवाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा है। पहाड़ी के शिखर और शहर के अंतिम छोड़ पर अवस्थित मेहरानगढ़ का किला मध्‍यकालीन राजशाही का मानो प्रति‍विंब है।

थार रेगिस्तान के किनारे बसा, जोधपुर का शानदार शाही शहर, रेगिस्तान की शून्यता में प्राचीन कथाओं से गूंजता है। किसी समय में यह मारवाड़ राज्य की राजधानी थी। ईसवीं सन् 1459 में इसकी नीवं राव जोधा ने रखी थी - वह राजपूतों के राठौड़ वंश के मुखिया थे जो अपने आपको रामायण के वीर नायक राम के वंशज मानते थे। उनके पिता रनदेव की हत्या मेवाड़ मे हो गई थी इस लिए उन्हें वो इलाका छोड़ना पड़ा शुरू मे मंडोर जोधा की राजधानी थी किंतु बाद मे जोधपुर उनका केन्द्र बना जोधपुर का किला मेहरानगढ कहलाता है जो चिडियानाथ की टूक पहाडी पे बना है ये गुजरात से दिल्ली के व्यापर मार्ग पे बसा था अत व्यापार से जोधा को बहुत लाभ होता था

मेहरानगढ़ का किला पहाड़ी के बिल्‍कुल ऊपर बसे होने के कारण राजस्‍थान के सबसे खूबसूरत किलाओं में से एक है। इस किला के सौंदर्य को श्रृंखलाबद्ध रूप से बने द्वार और भी बढ़ाते हैं। इन्‍हीं द्वारों में से एक है-जयपोल। इसका निर्माण राजा मानसिंह ने 1806 ईस्‍वी में किया था। किले के अंदर में भी पर्यटकों को देखने हेतु कई महत्‍वपूर्ण इमारतें हैं। जैसे मोती महल, सुख महल, फूलमहल आदि-आदि।