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स्वतंत्रता संग्राम
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| राजस्थान रे इलाका मांय 19वीं शताब्दी में ईस्ट इण्डिया कम्पनी रो राजनीतिक प्रभुत्व होणे रे कारण युद्ध अर अशान्ति रो वातावरण तो खतम हो चुक्यो हो, पण अटे रे लोगा ने इण वास्ते भारी कीमत चुकाणी पडी ही। राजस्थान री आन्तरिक अर विदेश नीति पर अंग्रेजा रो पूरो अधिकार हुयग्यो हो अर राजा लोग इयारे हाथ री कठपुतली बण गिया हा। ऐडी स्थिति मांय राजस्थान री जनता में भारत रे दूजा प्रान्ता अर राज्या रे समान विद्रोह री ज्वाला सुलगण लागी, अर 1857 रे पेले स्वाधीनता संग्राम में राजस्थान भी विद्रोह री ज्वाला सु अछूतो नीं रह्यो।
राजस्थान मांय 1857 रो स्वाधीनता संग्राम
नसीराबाद
सबसु पेला नसीराबाद में इण विद्रोह री शुरू आत हुई। इणरे पीछे मुख्य कारण यो हो कि ब्रिटिश सरकार अजमेर री 15वीं बंग़ाल इन्फ़ेन्ट्री ने नसीराबाद भेज दियो क्युकि सरकार ने इण पर विश्वास नीं हो। सरकार रे इण निर्णय सु सब सैनिक नाराज हुयग्या अर बे ब्रिटिश सरकार के खिलाफ़ क्रांति रो आगाज कर दियो। इणरे अलावा ब्रिटिश सरकार बम्बई रे सैनिका ने नसीराबाद में बुलवाया अर पूरी सेना री जंाच पड़ताल करणे वास्ते कह्यो। ब्रिटिश सरकार नसीराबाद में कई तोपा तैयार करवाई। इणसु भी नसीराबाद रा सैनिक नाराज हुयग्या अर बे विद्रोह कर दियो। सेनाकई ब्रितानिया ने मौत रे घाट उतार दियो अर साथे साथे वियारी सम्पत्ति भी नष्ट कर दी। इण सैनिकां रे साथे दूजा लोग भी शामल हुयग्या।
नीमच
नसीराबाद री घटना री खबर मिलते ही 3 जून 1857 ने नीमच रा विद्रोही कई ब्रितानिया नेे मौत रे घाट उतार दियो फ़लस्वरू प ब्रितानी भी बदलो लेणेे री योजना बणाई। बे 7 जून ने नीमच पर आपरो अधिकार कर लियो। बाद में विद्रोही राजस्थान रे दूसरे इलाका री तरफ़ बढ़ने लाग्या।
जोधपुर
अटे रा कई लोग राजा तख्त सिंह रे शासन सु नाराज हा। जिके कारण एक दिन अटे रा सैनिक इयारे खिलाफ़ विद्रोह कर दियो। इयारे साथे आउवा रा ब्रिटिश विरोधी कुशाल सिंह भी हा।कुशाल सिंह रो सामनो करणे रे वास्ते लेफ़्टिनेंट हीथकोट रे साथे जोधपुर री सेना आई ही पण कुशाल सिंह इने परास्त कर दियो। बाद में ब्रितानी सेना आउवा रे किले पर आक्रमण करियो पण इने भी हार रो मुँह देखणो पडीयो लेकिन ब्रिगेडियर होम्स इ पराजय रो बदळो लेणो चावतो हो इण वास्ते बोे आउवा पर आक्रमण करियो अबे कुशाल सिंह किले ने छोड़ दियो अर सलुम्बर चला गिया। कुछ दिना बाद ब्रितानी आउवा पर अधिकार कर लियो अर अटे आतंक फ़ैलायो।
मेवाड़
मेवाड़ रा सामंत ब्रितानिया अर महाराणा सु नराज हा। इण सामन्ता में आपसी फ़ूट भी ही। महाराणा मेवाड़ रे सामन्ता ने ब्रितानिया री सहायता करणे री आज्ञा दी। इण टेम सलुम्बर रे रावत केसरी सिंह उदयपुर रे महाराणा ने चेतावनी दी कि यदि आठ दिन में बियारे परम्पराग़त अधिकार ने स्वीकार नीं करियो गयो तो बे बियारे प्रतिद्वंदी ने मेवाड़ रो शासक बणा देवेग़ा। सलुम्बर रे रावत केसरी सिंह आउवा रे ठाकुर कुशाल सिंह ने आपरे अटे शरण दी। इणी समय तांत्या टोपे राजपूताने री ओर कूच करियो। 1859 में नरवर रे मान सिंह इयारे साथे धोखो करियो अर इयाने गिरफ़्तार कर लियो। यद्यपि सामंत प्रत्यक्ष रू प सु ब्रिटिश सरकार रो विद्रोह नीं करियो पण विद्रोहिया ने शरण देर'र इण क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कोटा
ब्रिटिश अधिकारी मेजर बर्टन कोटा रे महाराजा ने बतायो कि अटे रे दो चार ब्रिटिश विरोधी अधिकारिया ने ब्रिटिश सरकार ने सौंप देणो चाहिये। पण महाराजाइण काम में असमर्थता जताई तो ब्रितानी इण महाराजा पर आरोप लगायो कि बे विद्रोहिया सु मिलयोडा हैं। इण बात री खबर मिलते ही सैनिक मेजर बर्टन ने मार डालियो। विद्रोही राजा रे महल ने घेर लिया, तब राजा करौली रे शासक सु सैनिक सहायता मांगी। करौली रा शासकसहयोग करियो अर विद्रोहिया ने महल रे पीछे खदेडीया। इणी समय जनरल एच.जी.राबर्टस आपरी सेना रे साथे चम्बल नदी रे किनारे पहुंच्या। इयाने देख'र विद्रोही कोटा सु भाग गिया।
राज्य रे दूजा क्षेत्रा में विद्रोह
इण विद्रोह में अलवर रे कई नेता हिस्सो लिदो। जयपुर में उस्मान खां अर सादुल्ला खांविद्रोह कर दियो। टोंक में सैनिकाविद्रोह कर दीयो अर नीमच विद्रोहिया ने टोंक आणे रो निमंत्रण दियो। ए टोंक रे नवाब रे घेरो डाल'र बियासु बकाया वेतन वसूल करियो। इणी तरह बीकानेर रा शासक नाना साहब ने सहायता रो आश्वासन दियो हो अर तांत्या टोपे जी री मदद रे वास्ते द्स हजार घुड़सवार सैनिक भेजिया। हालांकि राजस्थान रा अधिकांश शासक पूरे विद्रोह काल में ब्रितानिया रे प्रति वफ़ादार रहिया, फेर भी विद्रोहिया रे दबाव रे कारण बियाने यत्र-तत्र विद्रोहिया रोे समर्थन प्रदान करणो पडीयो।
राजस्थान में विद्रोह रो घटनाक्रम
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