राजस्थान की शान ऊंट

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स्तनधारी पशुओं में जिराफ के बाद ऊंट दूसरे नंबर
पर आता है। एक ऊंट औसतन 40-45 साल तक जिंदा रह
सकता है। ऊंट का वजन 450 से 650 किलोग्राम तक
होता है
तुमने रेगिस्तान के जहाज ऊंट के बारे में जरूर
सुना होगा और हो सकता है इसे तुमने देखा भी हो।
कूबड़ वाली ऊंची पीठ और लंबी-
लंबी टांगों वाले ऊंट देखकर तुम यह जरूर सोचते
होगे कि ये ऊंट दूर-दूर तक फैले रेत के सैलाब
वाले गर्म रेगिस्तान में कैसे रह पाते हैं, जहां न
केवल चिलचिलाती धूप, तेज गर्मी और धूल भरी तेज
हवाएं चलती हैं, बल्कि जीने के लिए
जरूरी पानी और वनस्पति की कमी भी होती है।
वास्तव में ऊंट अपने डील-डौल
की खूबियों की बदौलत ऐसे वातावरण
को आसानी से सह लेते हैं और वहां के जन-जीवन
के मुख्य ट्रांसपोर्ट भी हैं। वे पानी के जहाज
की तरह रेतीले सैलाब और टीलों पर आसानी से चल
सकते हैं और अपनी पीठ पर सवारी के साथ-साथ
सामान भी ले जाते हैं। यही कारण है कि उन्हें
‘रेगिस्तान का जहाज’ भी कहा जाता है।
तुम्हें मालूम होगा कि रेगिस्तान दुनिया भर के
सातवें हिस्से में फैले हुए हैं और ये गर्म
ही नहीं, ठंडे भी होते हैं। रेगिस्तानी मौसम के
हिसाब से आज दुनिया भर में दो तरह के ऊंट पाए
जाते हैं- पहला एक कूबड़ वाले डरोमेडरीज
या अरेबियन ऊंट। ये ऊंट लीबिया में सहारा,
अफ्रीका का कालाहारी, अरेबियन पेनन्सुला के
पास अरब रेगिस्तान, आस्ट्रेलिया के ग्रेट
सैंडी डेजर्ट, माजोवा, सोनारन, भारत के थार
मरुस्थल (जहां दिन के समय बहुत गर्मी होती है और
तापमान लगभग 50 डिग्री तक होता है) में पाए
जाते हैं। दूसरे दो कूबड़ वाले बैक्ट्रीयन ऊंट
अंटार्कटिका, ग्रीनलैंड, भारत के लेह-कारगिल,
सियाचिन जैसे बर्फीले रेगिस्तान मरुस्थलों में
पाए जाते हैं। यहां का तापमान 20 से 45
डिग्री तक नीचे गिर जाता है और
हड्डियों को कंपकंपा देने वाली सर्दी होती है।
दो कूबड़ वाले ऊंटों की खासियत होती है कि ये
बर्फीले रेगिस्तान हों या गर्म, जरूरत पड़ने पर हर
जगह रह सकते हैं।
विशाल स्तनधारी पशुओं में जिराफ के बाद ऊंट
दूसरे नंबर पर आता है। एक ऊंट औसतन 40-45 साल तक
जिंदा रह सकता है। गर्भवती ऊंटनी 12-14 महीने के
बाद बच्चे को जन्म देती है। जन्म के समय नवजात
ऊंट 50-70 किलोग्राम वजन का और तकरीबन 90
सेंटीमीटर लम्बा होता है। आमतौर पर नवजात ऊंट
जन्म के दो घंटे के बाद खड़ा हो जाता है। वह
अपनी मां का दूध एक साल तक पीता है और फिर
खाना खाने लगता है।
एक वयस्क ऊंट तकरीबन 7 फीट लंबा होता है।
उसका वजन 450 से 650 किलोग्राम तक होता है।
अरेबियन ऊंट बैक्ट्रीयन ऊंटों की तुलना में
अधिक लम्बा होता है, लेकिन बैक्ट्रीयन ऊंट
उससे अधिक भारी और मजबूत होता है। वह अपनी पीठ
पर 150-300 किलोग्राम वजन उठा सकता है। इसके
शरीर पर छोटे-छोटे फरनुमा बाल होते हैं।
बैक्ट्रीयन ऊंट के गले पर तो काफी लम्बे और
मोटे बाल होते हैं, जिनसे वो बर्फीले रेगिस्तान
में अपना बचाव कर पाता है।
इनकी रीढ़ की हड्डी के ऊपर पीठ पर, पिरामिड के
आकार का कूबड़ होता है, जो ऊंट के हिसाब से
छोटा-बड़ा होता है। एक स्वस्थ ऊंट की पीठ पर
20-25 इंच ऊंचा और 35 किलोग्राम वजन का कूबड़
होता है। कुछ लोगों का मानना है कि ऊंट अपने
कूबड़ में पानी जमा करके रखता है, जो सरासर गलत
है। वास्तव में उनके कूबड़ में फैट जमा होती है।
जब उन्हें रेगिस्तान में कई दिनों तक खाना-
पानी नहीं मिलता, तब कूबड़ में जमा फैट
ही उन्हें ऊर्जा प्रदान करता है। जैसे-जैसे यह
फैट खत्म होता जाता है, वैसे-वैसे ऊंट का कूबड़
काफी छोटा हो जाता है और एक तरफ झुक जाता है।
लेकिन जब ऊंट भरपेट भोजन या पानी पी लेता है
तो झुका हुआ यह कूबड़ फिर बड़ा हो जाता है।
ऊंट शाकाहारी जानवर है। बहुत लंबे समय तक ऊंट
प्यास सहन कर सकता है।