सूका सूका खेतडा पण नैणा मै बाढ ।
घर मँ कोनी बाजरी ऊपर सूँ दो साढ ॥
जद सूँ पाकी बाजरी काचर मोठ समेत ।
दिन भर नापै चाव सूँ पटवारी जी खेत ॥
फिर फिर आवै बादळी घिर घिर आवै मेह ।
सर सर करती पून मँ थर थर कांपै देह ॥
होगी सोळा साल री बेटी करै
बणाव ।
कद निपजैली टीबडी कद
मांडूला ब्याव ॥
टूटी फूटी झूँपडी बरसै गरजै गाज
।
इण चौमासै रामजी दोराँ रहसी लाज ॥
टाबर टीकर मोकळाँ करजै री भरमार ।
राम रूखाळी राखजै थाँ सरणै घरबार ॥
निरधनियाँ नै धन मिल्यो रोजणख्याँ नै राग ।
राम बता कद जागसी परदेसी रा भाग ॥
उगतो पिणघट ऊपराँ सुणतो मिठी बात ।
गळी गुवाडी घूमतो चान्दो सारी रात
॥
ना पिणघट ना बावडी ना कोयल ना छाँव ।
तो भी चोखो सहर सूँ म्हारो आधो गांव ॥
सांझ ढळ्याँ नित जांवता देखै सारो गांव ।
पिरमा थारी लाडली पटवारी रै ठांव
॥
पैली उठती गौरडी पाछै
उठती भोर ।
झांझर कै ही नीरती सगळा डांगर
ढोर ॥
छैल सहर सूँ बावडै खरचै धोबा धोब ।
पडै गांव मै रात दिन पटवारी सा रोब ॥
जद मन तरस्यो गांव नै जद जद हुयो अधीर ।
दूहा रै मिस
मांडदी परदेसी री पीर
॥
प्रीत
आपरी अचपळी घणी करै
कुचमाद ।
सुपना मै सामी रवै जाग्या आवै याद ॥
पाती लिख रियो गांव नै अपरंच ओ समचार ।
दुख पावुँ परदेस मँ जीवूँ हूँ मन मार ॥
राग रंग नी आवडै कींकर उपजै तान ।
घर मै कोनी बाजरी अर
टूट्योडी छान ॥
घर दे घर रूजगार दे घर घर री दे साख ।
ना देवै तो सांवरा जीवण पाछो राख ॥
बिन हरियाळी रूंखडा घरघूल्या सा ठांव ।
’राही’ दीखै दूर सूँ थारो आधो गांव ॥
लेग्या तो हा गांव सूँ कंचन देही राज ।
पाछी ल्याया सहर सूँ
खांसी कब्जी खाज ॥
गाय चराती छोरडयाँ जोबन सूँ अणजाण ।
देख ओपरा जा लूकै कर जांटी री आण ।।
जोध जुवानी बेलड्याँ मिलसी करयाँ बणाव ।
आखडजै मत पावणा पगडंड्या रै गांव ॥
के तडपासी बादळी के कोयल
री कूक ।
पैली ही सूँ काळजो हुयो पड्यो दो टूक ॥
अजब पीर परदेस री म मर जीवै
जीव ।
घर मै तरसै गोरडी परदेसाँ मै पीव ।।
ना आंचळ ना घूंघटो ना हीवडै मै लाज ।
घिरसत पाळै गोरडी रोटी पोवै राज ॥
घाटै रो घर दे दिये दुख दीजै अणचींत ।
मतना दीजे
सांवरा परदेसी री प्रीत ॥
धान महाजन रै घराँ ढोर बिक्या बे दाम ।
करज पुराणो बाप रो कीयाँ चुकै राम ॥
बेटो तो परदेस मै घर बूढा मा बाप ।
दोनो पीढी दो जघाँ दुख भोगै चुपचाप ॥
ठाला बिन रूजगार कै ताना देता लोग ।
भरी न अब तक गांव सूँ मनस्या बळण जोग ॥
जद जासी परदेस तूँ हुसी जद बरबाद ।
दरद दिसावर ई कडया रोज करैलो याद ॥
कितरा ही दुहा लिखूँ अकथ रहीज्या भाव ।
परदेसी रो दरद तो है गूंगै रो भाव ॥
राजस्थान की लोक कथाओं में बहुत सी प्रेम
कथाएँ प्रचलित है पर इन सबमे ढोला मारू प्रेम
गाथा विशेष लोकप्रिय रही है इस
गाथा की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात
से लगाया जा सकता है कि आठवीं सदी की इस
घटना का नायक ढोला राजस्थान में आज
भी एक-प्रेमी नायक के रूप में स्मरण
किया जाता है और प्रत्येक पति-पत्नी की सुन्दर
जोड़ी को ढोला-मारू की उपमा दी जाती है |
यही नहीं आज भी लोक गीतों में स्त्रियाँ अपने
प्रियतम को ढोला के नाम से ही संबोधित
करती है,ढोला शब्द पति शब्द
का प्रयायवाची ही बन चूका है |राजस्थान
की ग्रामीण स्त्रियाँ आज भी विभिन्न
मौकों पर ढोला-मारू के गीत बड़े चाव से गाती है
|
इस प्रेमाख्यान का नायक ढोला नरवर के
राजा नल का पुत्र था जिसे इतिहास में ढोला व
साल्हकुमार के नाम से जाना जाता है,
ढोला का विवाह बालपने में जांगलू देश
(बीकानेर) के पूंगल नामक ठिकाने के
स्वामी पंवार राजा पिंगल
की पुत्री मारवणी के साथ हुआ था | उस वक्त
ढोला तीन वर्ष का मारवणी मात्र डेढ़ वर्ष
की थी | इसीलिए शादी के बाद
मारवणी को ढोला के साथ नरवर
नहीं भेजा गया | बड़े होने पर ढोला की एक और
शादी मालवणी के साथ हो गयी | बचपन में हुई
शादी के बारे को ढोला भी लगभग भूल
चूका था | उधर जब मारवणी प्रोढ़ हुई
तो मां बाप ने उसे ले जाने के लिए
ढोला को नरवर कई सन्देश भेजे |
ढोला की दूसरी रानी मालवणी को ढोला की
पहली शादी का पता चल गया था उसे यह
भी पता चल गया था कि मारवणी जैसी बेहद
खुबसूरत राजकुमारी कोई और नहीं सो उसने डाह
व ईर्ष्या के चलते राजा पिंगल द्वारा भेजा कोई
भी सन्देश ढोला तक पहुँचने ही नहीं दिया वह
सन्देश वाहको को ढोला तक पहुँचने से पहले
ही मरवा डालती थी |
उधर मारवणी के अंकुरित यौवन ने अपना रंग
दिखाना शुरू कर दिया | एक दिन उसे स्वप्न में
अपने प्रियतम ढोला के दर्शन हुए उसके बाद तो वह
ढोला के वियोग में जलती रही उसे न खाने में
रूचि रही न किसी और कार्य में | उसकी हालत
देख उसकी मां ने राजा पिंगल से ढोला को फिर
से सन्देश भेजने का आग्रह किया, इस बार
राजा पिंगल ने सोचा सन्देश वाहक
को तो मालवणी मरवा डालती है इसीलिए इस
बार क्यों न किसी चतुर ढोली को नरवर
भेजा जाय जो गाने के बहाने ढोला तक सन्देश
पहुंचा उसे मारवणी के साथ हुई
उसकी शादी की याद दिला दे |
जब ढोली नरवर के लिए रवाना हो रहा था तब
मारवणी ने उसे अपने पास बुलाकर मारू राग में
दोहे बनाकर दिए और समझाया कि कैसे ढोला के
सम्मुख जाकर गाकर सुनाना है | ढोली (गायक) ने
मारवणी को वचन दिया कि वह
जीता रहा तो ढोला को जरुर लेकर आएगा और
मर गया तो वहीँ का होकर रह जायेगा |
चतुर ढोली याचक बनकर किसी तरह नरवर में
ढोला के महल तक पहुँचने में कामयाब हो गया और
रात होते ही उसने ऊँची आवाज में गाना शुरू
किया | उस रात बादल छा रहे थे,अँधेरी रात में
बिजलियाँ चमक रही थी ,झीणी-
झीणी पड़ती वर्षा की फुहारों के शांत
वातावरण में ढोली ने मल्हार राग में गाना शुरू
किया ऐसे सुहाने मौसम में ढोली की मल्हार राग
का मधुर संगीत ढोला के कानों में गूंजने लगा और
ढोला फन उठाये नाग की भांति राग पर झुमने
लगा तब ढोली ने साफ़ शब्दों में गाया -
" ढोला नरवर सेरियाँ,धण पूंगल गळीयांह |"
गीत में पूंगल व मारवणी का नाम सुनते
ही ढोला चौंका और उसे बालपने में हुई
शादी की याद ताजा हो आई | ढोली ने
तो मल्हार व मारू राग में मारवणी के रूप
का वर्णन ऐसे किया जैसे पुस्तक खोलकर सामने
कर दी हो | उसे सुनकर ढोला तड़फ उठा |
दाढ़ी(ढोली) पूरी रात गाता रहा | सुबह
ढोला ने उसे बुलाकर पूछा तो उसने पूंगल से
लाया मारवणी का पूरा संदेशा सुनाते हुए
बताया कि कैसे मारवणी उसके वियोग में जल
रही है |
आखिर ढोला ने मारवणी को लाने हेतु पूंगल जाने
का निश्चय किया पर मालवणी ने उसे रोक
दिया ढोला ने कई बहाने बनाये पर मालवणी उसे
किसी तरह रोक देती | पर एक दिन ढोला एक बहुत
तेज चलने वाले ऊंट पर सवार होकर
मारवणी को लेने चल ही दिया और पूंगल पहुँच
गया | मारवणी ढोला से मिलकर ख़ुशी से झूम
उठी | दोनों ने पूंगल में कई दिन बिताये और एक
दिन ढोला ने मारूवणी को अपने साथ ऊंट पर
बिठा नरवर जाने के लिए राजा पिंगल से
विदा ली | कहते है रास्ते में रेगिस्तान में
मारूवणी को सांप ने काट खाया पर शिव
पार्वती ने आकर मारूवणी को जीवन दान दे
दिया | आगे बढ़ने पर ढोला उमर-सुमरा के षड्यंत्र में
फंस गया, उमर-सुमरा ढोला को घात से मार कर
मारूवणी को हासिल करना चाहता था सो वह
उसके रास्ते में जाजम बिछा महफ़िल जमाकर बैठ
गया | ढोला जब उधर से गुजरा तो उमर ने उससे
मनुहार की और ढोला को रोक लिया | ढोला ने
मारूवणी को ऊंट पर बैठे रहने दिया और खुद उमर के
साथ अमल की मनुहार लेने बैठ गया |
दाढ़ी गा रहा था और ढोला उमर अफीम
की मनुहार ले रहे थे , उमर सुमरा के षड्यंत्र
का ज्ञान दाढ़ी (ढोली) की पत्नी को था वह
भी पूंगल की बेटी थी सो उसने चुपके से इस षड्यंत्र
के बारे में मारूवणी को बता दिया |
मारूवणी ने ऊंट के एड मारी,ऊंट भागने
लगा तो उसे रोकने के लिए ढोला दौड़ा, पास
आते ही मारूवणी ने कहा - धोखा है जल्दी ऊंट पर
चढो और ढोला उछलकर ऊंट पर चढ़ा गया | उमर-
सुमरा ने घोड़े पर बैठ पीछा किया पर
ढोला का वह काला ऊंट उसके कहाँ हाथ लगने
वाला था | ढोला मारूवणी को लेकर नरवर पहुँच
गया और उमर-सुमरा हाथ मलता रह गया |
नरवर पहुंचकर चतुर ढोला, सौतिहा डाह की नोंक
झोंक का समाधान भी करता है। मारुवणी व
मालवणी के साथ आनंद से रहने लगा |
इसी ढोला का पुत्र लक्ष्मण हुआ,लक्ष्मण
का भानु और भानु का पुत्र परम
प्रतापी बज्र्दामा हुआ जिसने अपने वंश
का खोया राज्य ग्वालियर पुन: जीतकर कछवाह
राज्यलक्ष्मी का उद्धार किया | आगे चलकर
इसी वंश का एक राजकुमार दुल्हेराय राजस्थान
आया जिसने
मांची,भांडारेज,खोह,झोटवाड़ा आदि के
मीणों को मारकर अपना राज्य स्थापित
किया उसके बाद उसके पुत्र काकिलदेव ने
मीणों को परास्त कर आमेर पर अपना राज्य
स्थापित किया जो देश की आजादी तक उसके
वंशजों के पास रहा | यही नहीं इसके वंशजों में
स्व.भैरोंसिंहजी शेखावत इस देश के
उपराष्ट्रपति बने व इसी वंश के श्री देवीसिंह
शेखावत की धर्म-
पत्नी श्रीमती प्रतिभापाटिल आज इस देश
की महामहिम राष्ट्रपति है |
ढोला को रिझाने के लिए दाढ़ी (ढोली)
द्वारा गाये कुछ दोहे -
आखडिया डंबर भई,नयण गमाया रोय |
क्यूँ साजण परदेस में, रह्या बिंडाणा होय ||
आँखे लाल हो गयी है , रो रो कर नयन गँवा दिए
है,साजन परदेस में क्यों पराया हो गया है |
दुज्जण बयण न सांभरी, मना न वीसारेह |
कूंझां लालबचाह ज्यूँ, खिण खिण चीतारेह ||
बुरे लोगों की बातों में आकर
उसको (मारूवणी को) मन से मत निकालो |
कुरजां पक्षी के लाल बच्चों की तरह वह क्षण
क्षण आपको याद करती है | आंसुओं से भीगा चीर
निचोड़ते निचोड़ते उसकी हथेलियों में छाले पड़
गए है |
जे थूं साहिबा न आवियो, साँवण पहली तीज |
बीजळ तणे झबूकडै, मूंध मरेसी खीज ||
यदि आप सावन की तीज के पहले नहीं गए तो वह
मुग्धा बिजली की चमक देखते ही खीजकर मर
जाएगी | आपकी मारूवण के रूप का बखान
नहीं हो सकता | पूर्व जन्म के बहुत पुण्य करने
वालों को ही ऐसी स्त्री मिलती है |
नमणी, ख़मणी, बहुगुणी, सुकोमळी सुकच्छ |
गोरी गंगा नीर ज्यूँ , मन गरवी तन अच्छ ||
बहुत से गुणों वाली,क्षमशील,नम्र व कोमल है ,
गंगा के पानी जैसी गौरी है ,उसका मन और तन
श्रेष्ठ है |
गति गयंद,जंघ केळ ग्रभ, केहर जिमी कटि लंक |
हीर डसण विप्रभ अधर, मरवण भ्रकुटी मयंक ||
हाथी जैसी चाल, हीरों जैसे दांत,मूंग सरीखे होठ
है | आपकी मारवणी की सिंहों जैसी कमर
है ,चंद्रमा जैसी भोएं है |
आदीता हूँ ऊजलो , मारूणी मुख ब्रण |
झीणां कपड़ा पैरणां, ज्यों झांकीई सोब्रण ||
मारवणी का मुंह सूर्य से भी उजला है ,झीणे
कपड़ों में से शरीर यों चमकता है मानो स्वर्ण
झाँक रहा हो |
दोहे व उनका भावार्थ
रानी लक्ष्मीकुमारी चुण्डावत द्वारा लिखित
पुस्तक "राजस्थान की प्रेम कथाएँ" से लिए गए है व
चित्र गूगल खोज परिणामों से |
मोरू भाई पांवणा
आया आया रे
मोरू भाई पांवणा
कांई आगे धोरा वाळो देश
बीरो बणजारो रे
कांई आया म्हारा देवर जेठ
बीरो बणजारो रे
सासू रांध्या रे मोरू भाई बांकळा
म्हारी नणद बिलोवे खाटी छाछ
बीरो बणजारो रे
मंगरिया उंछाळू रे
मोरू भाई बांकळा
नदिया में लिमोऊं खाटी छाछ
बीरो बणजारो रे
माथा धोऊं रे
मोरू भाई मेट सूं
कांई घालूं चमेली रो तेल
बीरो बणजारो रे
-------------------------------------
म्हाने चूंदड़ी मंगादे रे
म्हाने चूंदड़ी मंगादे रे
ओ नण्दी के बीरा
तने यूँ घूंघट में राखूंगी ओ नण्दी के बीरा
म्हाने रखड़ी घड़ादे रे ओ नण्दी के बीरा
तने यूँ माथे पर सजालूंगी ओ नण्दी के बीरा
म्हाने चूंदड़ी मंगादे रे
ओ नण्दी के बीरा
-------------------------------------
म्हारा दादाजी के
जी मांडी गणगोर
म्हारा दादाजी के जी मांडी गणगौर
म्हारा काकाजी के मांडी गणगौर
रसीया घडी दोय खेलवाने जावादो
घडी दोय जावता पलक दोय आवता सहेलियाँ में
बातां चितां लागी हो रसीया घडी दोय
खेलवाने जावादो
थारो नथ भलके थारो चुड़लो चमके
थारा नेना रा निजारा प्यारा लागे
हो मारुजी थारा बिना जिवडो भुल्यो डोले
---------------------------------------
म्हारी ऐ मंगेतर
बनी म्हारी आवे रे बनी मुस्काती आवे रे
के झीणे घूँघट में दीखे है मुखडो सोवनों रे
म्हारी ऐ मंगेतर काजळ वाळी
सुरमे वाळो रे नवाब के जोड़ी रो जवाब नहीं
सुरमे वाळो रे नवाब जोड़ी रो जवाब नहीं
जवाब नही जवाब नही
सुरमे वाळो रे नवाब के जोड़ी रो जवाब नहीं
म्हारी ऐ मंगेतर नथणी वाळी
मुंछो वाळो रे नवाब के जोड़ी रो जवाब नहीं
जवाब नहीं जवाब नहीं
मुंछो वाळो रे नवाब के जोड़ी रो जवाब नहीं
म्हारी ऐ मंगेतर कुरती वाळी
चोळे वालो रे नवाब के जोड़ी रो जवाब नहीं
जवाब नहीं जवाब नहीं
चोळे वालो रे नवाब के जोड़ी रो जवाब नहीं
म्हारी ऐ मंगेतर चुडियों वाळी
घड़ियों वाळो रे नवाब के जोड़ी रो जवाब नहीं
जवाब नहीं रे जवाब नहीं
घड़ियों वाळो रे नवाब जोड़ी रो जवाब नही
म्हारी ऐ मंगेतर लहेंगे वाळी
धोती वाळो रे नवाब के जोड़ी रो जवाब नही
जवाब नहीं जवाब नहीं
धोती वाळो रे नवाब के जोड़ी रो जवाब नहीं
म्हारी ऐ मंगेतर नखरेवाळी
गुस्से वाळो रे नवाब के जोड़ी रो जवाब नहीं
जवाब नहीं के जवाब नहीं
गुस्से वाळो रे नवाब के जोड़ी रो जवाब नहीं
-------------------------------------
म्हारे आलीजा री चंग
म्हारे आलीजा री चंग, बाजै अलगौजा रे संग,
फागण आयो रे !
रूंख-रूंख री नूंवी कूपळा, गीत मिलण रा अब गावै।
बन-बागां म काळा भंवरा, कळी-कळी ने हरसावै।
गूंझै ढोलक ताल मृदंग, बाजे आलीजा री चंग।।
फागण आयो रे !
आज बणी हर नारी राधा, नर बणिया है आज
किसन।
रंग प्रीत रो एडो बिखर्यो, गली-गली है
बिंदराबन।
हिवडै-हिवडै उठे तरंग, बाजे आलीजा री चंग।।
फागण आयो रे !
-------------------------------------
म्हारे से डरपत नहीं चूहा
म्हारे से डरपत नहीं चूहा
सेंध चलावै छप्पर में
कैसे पतो पड़ो बणजारिन
चूंटी ना छोड़ो चून
बहिन मेरी कर दियो
छेट चपटिया में
कोठी और कुठिला में
पंसेरी कर दिये मींग
बहिन मेरी जौ की
कर दई बेजरिया
चूहा मारन मैं गई
झट्ट बिलन में जाये
बहिन मेरी मौंछ
हिलावे गिट्टे में
--------------------------------------
म्हारों बालूड़ों ग्यो तो सासरे
म्हारों बालूड़ों ग्यो तो सासरे, जरमरियो
काईं काईं लायो रे वीरा डायजिये ...
जरमरियो ढ़ोलो
लाड़ी आयो ने अनुअर डायजिये ...
जरमरियो ढ़ोलो
बेड़ो लायो ने थाली डायजिये ...
जरमरियो ढ़ोलो
लोटो लायो ने लोटी डायजिये ...
जरमरियो ढ़ोलो
सीरस लायो ने ढ़ाल्यो डायजिये ...
जरमरियो ढ़ोलो
म्हारो बालूड़ो ग्यो तो सासरे ...
जरमरियो ढ़ोलो
काईं काईं लायो रे वीरा डायजिये ...
जरमरियो ढ़ोलो।
--------------------------------------
म्हें तो सगलाई देवता भेट्यां रे भंवरा
म्हें तो सगलाई देवता भेट्यां रे भंवरा।
म्हारे मायाजी रे तोले कोई नहीं भंवरा।
म्हे तो सगलाई कुलदेव भेंट्या रे भंवरा।
म्हारे भोपाजी रै तैल सिंदूर चढ़े रे भंवरा।
म्हें तो सगलाई देवां ने भेंट्या रे भंवरा।
म्हारे मायाजी रे तोले कोई नहीं रे भंवरा।
--------------------------------------
म्हें थांने पूछां म्हारी धीयड़ी
म्हें थांने पूछां म्हारी धीयड़ी
म्हें थांने पूछां म्हारी बालकी
इतरो बाबा जी रो लाड़, छोड़ र बाई सिध
चाल्या।
मैं रमती बाबो सो री पोल
मैं रमतो बाबो सारी पोल
आयो सगे जी रो सूबटो, गायड़मल ले चाल्यो।
म्हें थाने पूंछा म्हारी बालकी
म्हें थाने पूंछा म्हारी छीयड़ी
इतरों माऊजी रो लाड़, छोड़ र बाई सिध
चाल्या।
आयो सगे जी रो सूबटो
हे, आयो सगे जी रो सूबटो
म्हे रमती सहेल्यां रे साथ, जोड़ी रो जालम ले
चाल्यो।
हे खाता खारक ने खोपरा
रमता सहेलियां रे साथ
मेले से हंसियों लेइ चाल्यों
हे पाक्या आवां ने आबंला
हे पाक्यां दाड़म ने दाख
म्लेइ ने फूटर मल वो चाल्यो
म्हें थाने पूंछा म्हारी धीयड़ी
इतरों बापा जी रो लाड़, छोड़ने बाई सिध
चाल्या।
------------------------------------
रणुबाई रणुबाई रथ सिनगारियो तो
रणुबाई रणुबाई रथ
सिनगारियो तो को तो दादाजी हम गोरा घर
जांवा जांवो वाई जावो बाई हम
नहीं बरजां लम्बी सड़क
देख्या भागी मती जाजो उँडो कुओ
देख्या पाणी मती पीजो चिकनी सिल्ला देखी न
पाँव मती धरजो पराया पुरुष
देखनी हसी मती करजो
------------------------------------
राजी राजी बोल
बनी तो चुड़लो पेरादूं
राजी राजी बोल बनी तो चुड़लो पेरादूं
बेराजी बोले तो म्हारी लाल चिटियो,
म्हारी फूल चिटियो
नवी नारंगी रो खेल बतादूं रसिया ....
मीठी खरबूजो
राजी राजी बोल बनी तो तीमणियौ पैराधूं
बैराजी बोले तो म्हारी लाल चिटियों ...
म्हारी फूल चिटियों
नई नारंगी रो खेल बता दू रसिया ..
मीमो खरबूजों।
-------------------------------------
रिमझिम-रिमझिम मेहा बरसे
रिमझिम-रिमझिम मेहा बरसे, काळा बादळ
छाया रे।
पिया सूं मलबां गांव चली, म्हारे पग में पड
ग्या छाला रे।
रिमझिम........
भरी ज्वानी म्हांने छोड गया क्यूं, जोबन
का रखवाला रे।
सोलह बरस की रही कुंवारी, अब तो कर
मुकलावां रे।
रिमझिम...........
घणी र दूर सूं आई सजनवां, थांसू मिलवा रातां रे।
हाथ पकड म्हांने निकां बिठाया, कान में कर
गया बातां रे।
रिमझिम.......
-------------------------------------
रुमाल
लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो
म्हारी लाल ननद बाई रा बीरा रे रूमाल
म्हारो लेता जैजो
छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल
म्हारो लेता जैजो
लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो
छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल
म्हारो लेता जैजो
म्हारी लाल ननद बाई रा बीरा रे रूमाल
म्हारो लेता जैजो
आप रे कारण म्हे तो बाग़ लगायो सा
घुमण रे मिस आजो नैना रा लोभी
हरियो रुमाल
म्हारो लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो
छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल
म्हारो लेता जैजो
आप रे कारण म्हे तो थाळ परोस्यो सा
आप रे कारण म्हे तो भोजन परोस्यो सा
जीमण रे मिस आजो नैना रा लोभी
हरियो रुमाल
म्हारो लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो
लाल ननद भाई रा बीरा रे रुमाल
म्हारो लेता जैजो
आप रे कारण म्हे तो होद भरायो सा
नहावण रे मिस आजो नैना रा लोभि
हरियो रुमाल
म्हारो लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो
छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल
म्हारो लेता जैजो
लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो
छोटी ननद बाई रा बीरा रे रूमाल
म्हारो लेता जैजो
म्हारी लाल ननद बाई रा बीरा रे रूमाल
म्हारो लेता जैजो
-------------------------------------
लहेरियो
इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा
म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा
म्हाने ल्याईदो नी बाईसा रा बीरा लहेरियो सा
म्हाने
ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोला लहेरियो सा
म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा
म्हारा सुसराजी तो दिल्ली रा राजवी सा
म्हारा सासूजी तो गढ़ रा मालक सा
इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा
म्हाने
ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोला लहेरियो सा
म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा
म्हारा जेठजी तो घर रा पाटवी सा
म्हारा जेठानी तो घर रा मालक सा
इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा
म्हाने
ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोला लहेरियो सा
म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा
म्हारो देवरियो तो तारा बिचलो चंदो सा
महरी द्योरानी तो आभा माय्ली बीजळी सा
इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा
म्हाने
ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोला लहेरियो सा
म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा
म्हारा सायब्जी तो दिल रा राजवी सा
म्हें तो सायब्जी रे मनडे री राणी सा
इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा
म्हाने
ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोला लहेरियो सा
म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा
म्हाने
ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोला लहेरियो सा
ओन लाइन लहरियो गीत
ओन लाइन लहरियो गीत
-------------------------------------
शहर बाजार में
जाइजो हो बना जी हो राज
शहर बाजार में जाइजो हो बना जी हो राज
पान मंगाय वो रंगतदार बनजी बांगा माहे
पांन खाय बनी सांभी सभी, बना हजी हो राजे
बनो खीचे बनी से हाथ .. हो बांगा माहे
हाव्यलड़ों मत खीचों बना जी हो राजे
रुपया लेस्सूँ सात हजार .... हो बांगा माहे
ऊधार फुझाब मैं नहीं करां हो राज
रुपया गिगलां सात हजार ... हो बांगा माहे
शहर बाजरां मती जाइजो हो राज
म्हांने परदेसी रो कांई रे विसवास ..
हो बांगा माहे....
-------------------------------------
सात सहेल्यां रे झूलरे
सात सहेल्यां रे झूलरे,
पणिहारी जीयेलो मिरगानेणी जीयेलो
पाण्यू चाली रे तालाब, बाला जो
काळी रे कळायण उमडी ए*पणिहारी जीयेलो,
मिरगानेणी*जीयेलो,
छोटोडी बूंदां रो बरसे मेह, बालाजो।
आज धराऊं धूंधलो ए पणिहारी..........
मोटोडो धारां रो बरसे मेह, बाला जो।
भर नाडा भर नाडयां ए पणिहारी..........
भरियो-भरियो समंद तलाब, बाला जो।
सुणल्यो सहेल्यो म्हारी भायल्यो
सुपनो जी आयो आधी रात
सहेल्यो थानें सुपनों सुणाऊं ए sss २
नौ तो कुआ दस बावड़ी भरिया ताळ तळाब
सुपनें में मैं तो सासरियो देख्यो ए sss २
ऊँची मेडी चढ़ चली गढ़ छूवै असमान
सासरियो म्हाने बाल्हो लाग्यो ए sss २
मायड़ सी म्हारी सास छी बाबुल सा ससुर सुजान
नणदली म्हारे घणी मन भाई ए sss २
सेज बिछी रंग महल में फूलां स्यूं सेज सजाई
पियाजी रंग महल्याँ पधारया ए sss २
मधरी-मधरी चाल छी होठां पे मुस्कान
पियाजी म्हारे घणा मन भाया ए sss २
घूंघटो उठायो म्हारो प्रेम से नैणा स्यूं नैण मिलाय
पियाजी म्हारे नैणा में समाया ए sss २
पलकां झुकी म्हारी लाज स्यूं होठां स्यूं
बोल्यो नाहीं जाय
पियाजी म्हानें अंग लगाया ए sss २
पाछे सुपनों टूटग्यो, रहगी अधूरी आस
सहेल्यां थाने अब के सुणाऊं ए sss २ स्थाई
-------------------------------------
सूती थी रंग महल में
सूती थी रंग महल में, सूती ने आयो रे जंजाळ,
सुपना रे बैरी झूठो क्यों आयो रे।
कुरजां तू म्हारी बैनडी ए, सांभळ म्हारी बात,
ढोला तणे ओळमां भेजूं थारे लार।
कुरजां ए म्हारो भंवर मिला देनी ए।
सोनी गढ़ को खड़को
सोनी गढ़ को खड़को म्हे सुन्यो सोना घड़े रे सुनार
म्हारी गार कसुम्बो रुदियो
सोनी धड़जे ईश्वरजी रो मुदड़ो,
वांकी राण्या रो नवसर्यो हार म्हांरी गोरल
कसुम्बो रुदियो
वातो हार की छोलना उबरी बाई
सोधरा बाई हो तिलक लिलाड़ म्हारे गोर
कसुम्बो रुदियो
---------------------------------------
हमको गुलाबी दुपट्टा
हमको गुलाबी दुपट्टा
हमें तो लग जायेगी नजरिया रे
चाहे राजा मारो चाहे पुचकारो
हम पे ना आवे थारो पनिया
हमारी पतळी सी कमरिया रे
चाहे राजा मारा चाहे पुचकारो
हम पे ना होवे थारो गोबर
हमार सड़ जायेगी उंगलियां रे
चाहे राजा मारो चाहे पुचकारो
हम पे ना हौवे थारी रोटी
हमारी जळ जायेगी उंगलियां रे
चाहे राजा मारो चाहे पुचकारो
हम पे ना हौवे थारो बिस्तेर
हमारी छोटी सी उमरिया रे
--------------------------------------
हरियो रूमाळ
चाहे बिक जाये हरियो रूमाळ
बैठूंगी मोटर कार में
चाहे सास बिको चाहे ससुर बिको
चाहे बिक जाये नणद छिनार
बैठूंगी मोटर कार में
चाहे देवर बिको चाहे देराणी बिको
चाहे बिक जाये सारा रूमाळ
बैठूंगी मोटर कार में
चाहे जेठ बिको चाहे जेठाणी बिको
चाहे बिक जाये हरियो रूमाळ
बैठूंगी मोटर कार में
चाहे बलम बिको चाहे सौंक बिको
चाहे बिक जाये सांस को लाल
बैठूंगी मोटर कार में
--------------------------------------
हाँजी म्हारे आँगन कुओ
हाँजी म्हारे आँगन कुओ
खिनयदो हिवड़ा इतरो पानी हाँजी जुड़ो खोलर
न्हावा बेठी ईश्वरजी री रानी
हाँजी झाल झलके झुमना रल के बोले इमरत
बानी हाँजी इमरत
का दो प्याला भरिया कंकुरी पिगानी
-------------------------------------
ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ
ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ
ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ
घुमर रमवा म्हें जास्याँ
ओ राजरी घुमर रमवा म्हें जास्याँ
ओ म्हाने रमता ने काजळ टिकी लादयो ऐ माँ
घुमर रमवा म्हें जास्याँ
ओ राजरी घुमर रमवा म्हें जास्याँ
ओ म्हाने रमता ने लाडूङो लादयो ऐ माँ
घुमर रमवा म्हें जास्याँ .
ओ राजरी घुमर रमवा म्हें जास्याँ .
ओ म्हाने परदेशियाँ मत दीजो रे माँ
घुमर रमवा म्हें जास्याँ
ओ राजरी घुमर रमवा म्हें जास्याँ
ओ म्हाने राठोडा रे घर भल दीजो ऐ माँ
घुमर रमवा म्हें जास्याँ
ओ राजरी घुमर रमवा म्हें जास्यां
ओ म्हाने राठोडा री बोली प्यारी लागे ऐ माँ
घुमर रमवा म्हें जास्याँ
ओ राजरी घुमर रमवा म्हें जास्यां
ओ म्हारी घुमर छे नखराळी ऐ माँ
घुमर रमवा म्हें जास्याँ ...
--------------------------------------
हरिया पोदीना
ओ लुळ ओ झुक
ओ लुळ जाई रे हरिया पोदीना
ओ झुक जाई रे हरिया पोदीना
ओ तने सिल पे बटांऊं हरिया पोदीना
ओ झुक जाई रे हरिया पोदीना
क्यारियां में बाऊं केवडो़ खेताँ में बाऊं
हरियो पोदिनो
ओ लुळ ओ झुक
ओ लुळ जाई रे हरिया पोदीना
ओ झुक जाई रे हरिया पोदीना
माथा पे ल्याई केवडो़ झोळी में ल्याई
हरियो पोदिनो
ओ लुळ ओ झुक
ओ लुळ जाई रे हरिया पोदीना
ओ झुक जाई रे हरिया पोदीना
सासूजी ने भावे केवडो़ सुसराजी ने भावे
हरियो पोदिनो
ओ लुळ ओ झुक
ओ लुळ जाई रे हरिया पोदीना


